‘सवाल अब भी मौजूद है’ अपने पहले कविता संग्रह से सहगल की जो सशक्त लेखकीय छवि बनी वह उन्हें क्रमोत्तर आरोहीक्रम में बढ़ाती चली गई। फिर चाहे ‘आदिम आग’
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Aug- 2024 -17 Augustबुक रिव्यू
बुक रिव्यू- संस्मरणों की विश्वसनीयता का अखंड स्वरूप ‘जो दिल ने कहा’
संस्मरणों की विश्वसनीयता का अखंड स्वरूप ‘जो दिल ने कहा’ आधुनिक समय के लोकप्रिय नाटककार प्रताप सहगल की लिखी संस्मरणों की पुस्तक है।…
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